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पार्किंसंस रोग (Parkinson’s Disease) और उसके लक्षण (Symptoms)

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Hindi Disclaimer

पार्किंसंस रोग (Parkinson's Disease) और उसके लक्षण (Symptoms)

  • क्या चलते वक्त या खड़े रहते समय आप अपना संतुलन खो बैठते है
  • क्या आप हाथ, पैर, जबड़े और चेहरे में कम्पन होता है?
  • क्या आप अपने शरीर के भागो में कठोरता महसूस करते हैं?
  • क्या आप अपने सामान्य शरीर की गति में अचानक धीमी गति का अनुभव कर रहे हैं?

ये सभी पार्किंसंस रोग के लक्षण हैं। यदि आप इन उपरोक्त लक्षणों में से किसी का अनुभव कर रहे हैं तो आपको उचित चिकित्सा, निदान और उपचार के लिए डॉक्टर से मिलना चाहिए। रिलिवा फिजियोथेरेपी और रेहाब सेंटर (ReLiva Physiotherapy & Rehab) के विशेषज्ञ फिजियोथेरेपी की देखभाल से आपको उपरोक्त सभी लक्षणों से निपटने में मदद दिला सकती है।

पार्किंसंस रोग के प्रबंधन में फिजियोथेरेपी चिकित्सा (Physiotherapy treatment) एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। फिजियोथेरेपी मरीजों की चलने फिरने में सुधार लाने और उनकी शारीरिक क्षमता बढ़ाने पर केंद्रित है। फिजियोथेरेपी, चलने फिरने, संतुलन रखने और गिरने की शिक्षा रोगी को देती है और विभिन्न शारीरिक गतिविधियों के अभ्यास के माध्यम से सामान्य जीवन जीने में मदद करती है। 

Original article in English can be accessed here.

पार्किंसंस रोग क्या है?

 

पार्किंसंस रोग एक प्रगतिशील मस्तिष्क संबंधी विकार या मस्तिष्क रोग है। यह एक घातक बीमारी नहीं है लेकिन यह रोगि का जीवन बेहद  मुश्किल बना देता है।

हमारा मस्तिष्क, हमारे शरीर, उसके कार्यों और उसकी गतिविधियों को नियंत्रित करता है। मस्तिष्क हमारे शरीर के अन्य हिस्सों में (न्यूरोट्रांसमीटर) रसायनों के रूप में संदेश भेजता है।हमारे शरीर में जब डोपामाइन (dopamine) नiमक न्यूरोत्रन्स्मित्टर या रसायन काम हो जाता है तब पार्किंसंस रोग होता है जो शरीर की सारी गतिविधियोंको मुश्किल करता है पार्किंसंस रोग कुछ प्रमुख लक्षणों से पता लगाता है इन लक्षणोंका उपयोग इस बीमारी के निदान के लिए किया जाता है।

पार्किंसंस रोग कुछ शारीरिक तथा मानसिक लक्षण दिखाई देते है

निदान के लिए उपयोग किए जाने वाले प्रमुख लक्षण शारीरिक लक्षण हैं (शरीर संबंधित)

  • हाथों, पैरों, जबड़े और चेहरे के झटके या कम्पन का होना
  • चेहरे की अभिव्यक्ति में बदलाव, चलने फिरने में मुश्किल और शरीर में झुकाव 
  • शरीर की गति धीमी होना (ब्रैडेकिनेसिया)
  • आगे बढ़ने में असमर्थता (यह लक्षण अंतिम कमजोर चरण में होता है)।
  • अंग और धड़ में कठोरता

कुछ मानसिक लक्षण हैं

  • असुरक्षा, तनाव और चिंता
  • कब्ज
  • मंद गति से चलन
  • निस्तारण और निगलने में कठिनाई खड़ी करना
  • गंध की कमजोर समझ
  • मनोभ्रंश, भ्रम और स्मृति हानि
  • पुरुष स्तंभन दोष
  • त्वचा की समस्याएं
  • धीमा स्वर या आवाज और शांत भाषण
  • मूत्र तात्कालिकता

पार्किंसंस का निदान कैसे किया जाता है?

पार्किंसंस रोग का कोई विशिष्ट निदान नहीं है इसलिए लक्षण देखकर निदान किया जाता है। कोई रक्त परीक्षण या मस्तिष्क स्कैन उपलब्ध नहीं है जो निश्चित रूप से इस रोग का निदान कर सके।

इस बीमारी का निदान किया जाता है यदि रोगियों में कम से कम दो या तीन प्रमुख लक्षण मौजूद होते हैं जैसे कि झटके, कठोरता या धीमी गति का होना। आमतौर पर ये लक्षण शरीर के एक तरफ पहली बार होने लगते हैं | ऐसी कई दवाइयां उपलब्ध हैं जो झटके, कठोरता, चलन फिरने की धीमी गति और संतुलन में कमी को कम कर सकते हैं। अनुसंधान और अध्ययन जारी है जो नई दवाएं बनाएंगे जो इस रोग की प्रगति को रोक सकते हैं। यदि दवाएं अप्रभावी होती है तो डॉक्टर मस्तिष्क का ऑपेरशन भी करते है जिसे डीप ब्रायन स्टिमुलेशन कहते है। कई बार ऑपरेशन काफी नुकसानदेह साबित हुआ है इसलिए अंतिम उपचार के रूप में ही दुर्लभ मामलों में ही शल्य-चिकित्सा कि जाती है।

 

पार्किंसंस के लिए वैकल्पिक उपचार

आयुर्वेदिक चिकित्सा पार्किंसंस रोग के सबसे लोकप्रिय वैकल्पिक उपचारों में से एक है। आयुर्वेद का जन्म भारत में हुआ और ये 5000 वर्ष से अधिक पुराना विज्ञान है। आयुर्वेदिक दवाएं विशेष आहार के साथ काम करती हैं और व्यायाम भी करने करने की सलाह देती है। आयुर्वेद विशेष ध्यान प्रथाओं, विशेष प्रकार की जड़ी-बूटियों,मालिश का उपयोग करता है इस रोग का इलाज करने के लिए जोड़ों और अंगों के विशेष रूप से बनाये गए  अभ्यास का उपयोग करता है। उदाहरण के लिए, म्यूकुन प्रुरीन्स नामक जड़ी-बूटि जिनका भारतीय नाम आत्मानगुप्त, कांच, केवंच है जो लेवोडोपा नामक औषधि की नकल कर सकते हैं।

 

पार्किंसंस का इलाज

पार्किंसंस एक प्रगतिशील बीमारी है और इसका इलाज लक्षणों के प्रबंधन, फिजियोथेरेपी और दवाओं के साथ लक्षणों में देरी लाने पर केंद्रित है । चिकित्सक रोगी में कुछ लक्षणों को देखने के बाद ही इस रोग की पुष्टि करता है| दूसरे हाथ फिजियोथेरेपी मरीजों को गतिविधियों की कठिनाइयों को संतुलित करने में मदद करता है| फिजियोथेरेपिस्ट भी मूलभूत गतिविधियों को सिखाता है| जैसे कि हर दिन की बुनियादी गतिविधियों में मांसपेशियों को नियंत्रित करना। फिजियोथैरेपी रोगियों को एक स्वस्थ जीवन शैली प्राप्त करने में मदद करता है|, हालांकि वे इस बीमारी के लक्षणों को ठीक नहीं कर सकते हैं| लेकिन वे निश्चित रूप से रोगियों की स्थिति में सुधार कर सकते हैं। दवाओं पर भरोसा करना महत्वपूर्ण है| मगर उनका दुष्प्रभाव होता है| और वे शरीर को विषाक्तता भी करते हैं।

फिजियोथेरेपी, व्यायाम, स्वस्थ जीवन शैली और आहार के साथ, पार्किंसंस रोग के लक्षणों से निपटना आसान है| समन्वय और गतिविधियों को सिखाता है। सामान्य जनसंख्याको पार्किंसंस रोग की कोई जानकारी नहीं है । पार्किंसंस की बीमारी क्या है? इसके प्रभाव और कारण क्या हैं? हमें पार्किंसंस रोग के बारे में जागरुकता पैदा करने की आवश्यकता है| ताकि लोग इस रोग से ग्रस्त लोग उचित देखभाल और उपचार ले सकें।

 

पार्किंसंस रोग के कारण क्या है?

ये रोग आमतौर पर बड़े उम्र के लोगो में पाया जाता है| जो लोग आम तौर पर 60 वर्ष से अधिक उम्र के होते हैं। उन लोगो मैं ये ज्यादा पाया जाता है| अध्ययनों से पता चला है कि पार्किंसंस सामान्य रूप से महिलाओं की तुलना में पुरुषों को अधिक प्रभावित करता है। पार्किंसन रोग अगर परिवार में किसीको रहा हो तो ये रोग अगली पीढ़ी को भी होने की सम्भावनाये है। आनुवंशिक कारन और पर्यावरणीय कारन ज्यादातर इस विकार से जुड़े हुए हैं। कुछ लोग किटकनाशको का इस्तेमाल, पर्यावरण प्रदूषण का उच्च स्तर, सिर को आघात और बीमारिया जिसमे विषाक्त पदार्थों  के सम्बन्ध में आना भी बीमारी की वजह बताते है|, हालांकि वैग्ज्ञानिकोणे ने अभी तक इस रोग के सटीक कारण की पहचान नहीं की है। अनुसंधान अभी भी जारी है इस रोग के सही कारण और इलाज खोजने के लिए ।

ज्यादातर साठ वर्ष या अधिक उम्र के लोग इस रोग से पीड़ित होते है|, लेकिन कुछ लोगों बहुत कम उम्र में पार्किंसंस रोग के लक्षणों से पीड़ित हैं। कुछ असामान्य मामलों में पार्किंसंस रोग के लक्षण बच्चों और किशोरों में पाए गए है। हाल के वर्षों में युवा आयु वर्ग के मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है।

पार्किंसंस की बीमारी नौकरी और साथ ही पारिवारिक जीवन को भी काफी प्रभावित कर सकती है। अंतिम चरण पर, सामान्य जीवन जीने के लिए हर दिन रोगी का संघर्ष होता है | पार्किंसंस रोग रोगियों के लिए हम सबसे बड़ी मदद कर सकते हैं, उन्हें हमारी मदत और धैर्य देकर। यह एक जटिल बीमारी है| जो मनुष्य को दूसरे पर निर्भर बना देती, रोगी अपनी स्वतंत्रता खो बैठता है। यह बहुत महत्वपूर्ण है| हमें पार्किंसंस रोग के लक्षणों के बारे में पता होना चाहिए। इस रोग के कारण विभिन्न व्यक्तियों पर अलग-अलग प्रभाव करते है। पार्किंसंस की बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को उचित पोषक तत्व, पर्याप्त नींद, व्यायाम के द्वारा उसकी स्थिति में सुधार हो सकता है। फिजिओथेरेपी, दवा और अन्य सहायक उपचार पार्किंसंस रोग उपचार के लिए उपयोग किया जाता है। इन उपचारों का उद्देश्य रोगियों के सामान्य शारीरिक  गतिविधियोंका को फिरसे वापस लाना और रोग के लक्षणोंको नियंत्रण में लाना है।

मरीजों के लिए सुझाव

पार्किंसंस रोग से पीड़ित रोगी ज्यादातर कमजोर, हताश और निराशा महसूस करते हैं| उन्हें शरीर में आये शारीरिक और मानसिक परिवर्तन से निपटना पड़ता है। सक्रिय रहने के लिए, सकारात्मक रहने के लिए मरीज कुछ चीजें कर सकते हैं

आहार

एक स्वस्थ आहार, जिसमें ताजा फल, सब्जियां, अनाज और प्रोटीन शामिल हैं, इस रोग से लड़ने में मदद करेंगे। ताजे फल और सब्जियां एंटीऑक्सिडेंट से भरी होती हैं, वे किसी भी पूरक से अधिक प्रभावी होती हैं। एक उच्च फाइबर आहार कब्ज को रोकने में मदद कर सकता है। जो पार्किंसंस रोग के रोगियों में आम है|

शारीरिक व्यायाम

पार्किंसंस के रोगियों को नियमित व्यायाम करना चाहिए | यह रोगी को ताकत और लचीलापन बनाए रखने में मदद करेगा और वे लंबे समय तक शारीरिक रूप से सक्रिय रह सकते हैं। रिलावा फिजियोथेरेपी और रीबहा सेंटर आपको उचित शारीरिक व्यायाम के साथ मदद करेगा, जो आप स्वस्थ और सक्रिय रहने के लिए हर रोज कर सकते हैं। रोगियों के लिए नियमित शारीरिक गतिविधि और अभ्यास आवश्यक है स्वस्थ रहने का एक और तरीका बागवानी, जॉगिंग, तैराकी है| सीमित क्षमता या गतिशीलता वाले रोगियों के लिए रिलाइव से एक उत्कृष्ट अभ्यास कार्यक्रम उपलब्ध है। स्वस्थ रहने के लिए कई मरीज़ योग या बैठने वाले एरोबिक्स का चुनाव कर सकते हैं।

पार्किंसंस के लिए व्यायाम

चलना

पार्किंसंस रोग का मुख्य लक्षण चलने में समस्या है। यह संतुलन के अभाव के कारण होता है| उचित तरीके से चलने और संतुलन सीखने से रोगी के लिए गिरने का खतरा कम हो सकता है। रीलिवा फिजियोथेरेपी और पुनर्वसन में, हमारे चिकित्सक पार्किन्सन के मरीजों को सुनिश्चित करने और जीवन की बेहतर गुणवत्ता प्राप्त करने के लिए एक व्यापक उपचार की आवश्यकता को समझते हैं।

अच्छा चलने वाले जूते खरीदना मरीज को आसानी से चलने में मदद करेगा और उन्हें गिरने से रोकेंगे। दौड़नेवाले जूते मदद नहीं करते हैं यदि उन्हें संतुलन समस्याएं हैं |

रोगी को सही तरीके के साथ धीरे धीरे चलने की जरूरत है शुरुआत में यह अजीब लग सकता है लेकिन कुछ दिनों में वे बेहतर हो जाएंगे।

गिरना

पार्किंसंस  मस्तिष्क में संतुलन और समन्वय केंद्र को प्रभावित करता है इसलिए अधिकांश पार्किंसंस रोगी अपना संतुलन नहीं रख पते है और वे अधिक गिरते हैं। रोगी को अपने संतुलन कौशल को सुधारने और बनाए रखने की आवश्यकता है

  • संतुलन में सुधार लाने के लिए अपने फिजियोथेरेपिस्ट से कुछ व्यायाम पूछें
  • ताइची प्राचीन चीनी मार्शल कला धीमे और सुन्दर गतिविधियों द्वारा मांसपेशियों और जोड़ों को आराम करने में मदद देती है, इसलिए इसे सीखना लाभप्रद हो सकता है
  • घर में कालीन न रखे इससे मरीज फिसल कर गिर सकता है
  • पूरे घर में हत्था लगाए ताकि मरीज आराम से उन्हें पकड़कर चल सके
  • हमेशा मरीज की पहुंच के भीतर फोन को रखो, कुर्सी या बिस्तर के पास रखना सही विचार है।

एंडिंग नोट्स (Ending Notes)

अग्रिम चरण में पार्किंसंस के रोगियों को लगातार देखभाल और ध्यान की आवश्यकता होती है। हर रोज़ सामान्य गतिविधियों को पूरा करना उनके लिए असंभव हो जाता है, इसलिए प्रत्येक दिन की गतिविधियों की पहले से ही योजना बनाकर रखे| पेशेवर देखभाल करने वाले को रखना काफी लाभप्रद होगा। रोगी को स्वस्थ रखने के लिए पर्याप्त आराम और उचित आहार के साथ सक्रिय दिन होना चाहिए। देखभाल करने वाले को रोगी को हर रोज़ गतिविधियों जैसे ब्रशिंग, स्नान, वॉश रूम आदि का उपयोग करने में मदद करना चाहिए। पार्किंसंस के रोगी की देखभाल करना एक कठिन काम है; परिवार और देखभाल करने वालों को लगातार सभी चिकित्सा आवश्यकताओं की जांच करना पड़ता है कई घरों मैं लोग मौजूद नहीं होते जो इन रोगियोंकी मदद कर सके। एक देखभाल करने वाले को नियुक्त करने से यह सुनिश्चित होगा कि वे अच्छी तरह से देखभाल करेंगे। यह भी महत्वपूर्ण है कि देखभाल करने वाले रोगियों की बीमारी के बारे में ज्यादा जानें - पार्किन्संस फाउंडेशन और पार्किंसंस भारत उपयोगी जानकारी प्रदान करता है

रोगी को समय पर दवा और देखभाल देना महत्वपूर्ण है। कई बार मरीज उठने में असमर्थ होता है या खड़े रहने में उन्हें दिक्कत होती है| इसलिए वे अपनी रोजकी दवाये लेने में भी असमर्थ होते है । एक पेशेवर देखभालदाता अपना समय रोगी की देखभाल के लिए समर्पित कर सकते हैं। उन्हें समय पर दवा देना महत्वपूर्ण है इससे उनकी हालत गंभीर नहीं होगी। कई पार्किंसंस रोगि उनके परिवार या देखभाल करने वालों पर पूरी तरह से निर्भर होते है| मरीज शरीर का नियंत्रण खो देते है या शरीर में हो रहे कम्पन से परेशां होते है। कई बार लोग अपने माता-पिता या पीडि़तों की देखभाल करने की कोशिश करते हैं जो पार्किंसंस की बीमारी से पीड़ित हैं, लेकिन अपने स्वयं के स्वास्थ्य और उनके भावनात्मक और वित्तीय स्थिति पर ध्यान नहीं दे पते है । वे अपने प्रियजनों की देखभाल करने में खुदको असमर्थ पते है । कीसी  पेशेवर देखभाल करनेवाले को रखना ज्यादा उनकेलिए लाभप्रद होगा| ताकि आपको इस स्थिति में तनाव, थकावट या निराशा महसूस न हो । परिवार के सदस्यों की भावनाओं को भी ध्यान में रखना बहुत महत्वपूर्ण है

एक अच्छी तरह से प्रशिक्षित पेशेवर देखभाल करने वाला रखे| जो इस बीमारी और इसके लक्षणों को समझ सकता है और जानता है| रोगी से कैसे व्यवहार करना है जनता है| साथ ही भावनात्मक और चिकित्सा जरूरत महत्वपूर्ण है| प्रत्येक रोगी के अनूठे लक्षण हो सकते हैं और भी स्वभाव देखभाल करने वाले को भावनात्मक और शारीरिक जरूरतों की देखभाल करने की आवश्यकता होती है। उनकी मदद करने के लिए रोगी को अत्यंत सावधानी, ध्यान और गरिमा देना महत्वपूर्ण है।

रोगी की हालत पर जांच करने के लिए नियमित चिकित्सक से मिलना, और जांच की आवश्यकता होती है। देखभाल करने वाले को डॉक्टरों को इस बीमारी की स्थिति और प्रगति के बारे में अद्यतन रखने की जरूरत है ताकि वे सही दवाएं लिख सकें। एक ही स्थान पर सभी रिपोर्टों के रिकॉर्ड को बनाए रखने से डॉक्टर को दैनिक और स्वास्थ्य में साप्ताहिक प्रगति के बारे में पता चल सकेगा।

हमने देखा है कि पार्किंसंस की बीमारी क्या है ?, इसके लक्षण क्या हैं? कैसे सही उपचार प्राप्त करने चाहिए |, रोगियों की देखभाल कैसे करें और मरीजों के लिए सुझाव |  रोगी को मदद करने के लिए यह सब बहुत महत्वपूर्ण है परिवार, दोस्तों और रोगियों को सकारात्मक रहने और खुश वातावरण को बनाए रखने की आवश्यकता है। यह एक बीमारी है जो आपको निराश महसूस कर सकती है लेकिन आप हमेशा सकारात्मक रहे, खुश रहने के लिए योग और ध्यान हालत में सुधार करने के सर्वोत्तम तरीकों में से एक है। इस बीमारी से निपटने बहुत बड़ी चुनौती हैं, यहाँ रोग मरीजों और उनके परिवारों के धैर्य का परीक्षण करती हैं।

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